हर्षित कुमार
आप भी माल हो, आप के लिए वो भी माल है। कोई लडकी भी माल है, दुकान के खीरे व सब्जी भी माल
है। आजकल जहां देखों वहीं माल है। ये माल शब्द आधुनिक समाज के लिए अब अतिविशिष्ट शब्द संरचना हैं।
कुछ समय पहले की तो बात है, जब "sexy"
शब्द
अभद्र और अश्लील लगता था। लेकिन अब देखिए न, "sexy"
शब्द
प्रतिष्ठा के उपरी पायदान का प्रतीक बन गया हैं।इसलिए कह
रहा हूँ, इस नए शब्द "माल" को भी सैक्सी शब्द की तरह ही स्वीकार कर
लीजिए। क्योंकि आप के लिए भी कोई माल है और आप भी किसी के माल है। फिर परहेज क्यों?
जब
मानसिकता परिवर्तन के तौर पर माल शब्द बना और इसका चलन बढ़ा है तो इसे स्वीकार भी
कर लीजिए।
क्या गजब माल है, ठोस माल है, ताजा माल है, महंगा है पर माल गजब का
है, माल नहीं है... इस तरह की बातें कई जगह सुनने को मिलती है. खासकर तब या तो कोई
बाजार से सम्बंधित बात हो होती या फिर कोई लड़का अपने दोस्त से किसी लडकी या महिला
के बारे में बात कर रहा होता है. लड़के या महिला के लिए माल कहने का मतलब उसकी “तारीफ़”
करने से होता है. भाई माल ही तो है, इसमें
नाराज होने की बात नहीं है। ऐसा मैं नहीं कह रहा, लोग कह रहे है. बाजार का चलन कह
रहा है, युवा कह रहे है। माना कोई महिला बाजार गई कुछ खरीदने। आप कहेंगे वो समान
ख़रीदने गई। लेकिन जिस दुकानदार के पास गई उसके लिए वो उसका माल ख़रीदने गई। वो
दुकानदार कहता है “मैम क्या माल है,ये देखिए न, आप भी क्या याद
करोगी।“
कोई जाता है सब्जीवाले भैया के पास। पूछते है, भैया फलां सब्जी कैसे है. जबाब मिलता है 50 या ६० रु किलो. सब्जी वाला यही नहीं रुकता, सब्जी की तारीफ़ में कहता है – ताजा माल है, टाइट है, नया और अच्छा माल है. ये लीजिए न एक बार ले जाएगें तो बार बार आयेंगे. अब फल वाले भैया के पास चलते है। भैया मौसमी कैसे है। जबाब मिलता है - अरे मैम देखने की बात क्या है, इसका तो अपना मजा है। पूरी मार्किट में इस माल जैसा कोई माल नही है, मैम बहुत मिठी है।
कोई जाता है सब्जीवाले भैया के पास। पूछते है, भैया फलां सब्जी कैसे है. जबाब मिलता है 50 या ६० रु किलो. सब्जी वाला यही नहीं रुकता, सब्जी की तारीफ़ में कहता है – ताजा माल है, टाइट है, नया और अच्छा माल है. ये लीजिए न एक बार ले जाएगें तो बार बार आयेंगे. अब फल वाले भैया के पास चलते है। भैया मौसमी कैसे है। जबाब मिलता है - अरे मैम देखने की बात क्या है, इसका तो अपना मजा है। पूरी मार्किट में इस माल जैसा कोई माल नही है, मैम बहुत मिठी है।
दरअसल, आज के परिवेश में माल शब्द ने कई रूपक धारण कर लिए है. इसका
इस्तेमाल भी ब्यापक रूप में होने लगा है. कई जगह सभ्य और सौम्य युवा भी सैक्सी
शब्द के स्थान पर इस शब्द (माल) का खूब इस्तेमाल करते है. मॉल कल्चर में मनचलों व
दिलफेंक लड़कों द्वारा लड़कियों को माल कहा जाने लगा है, जिस पर कुछ तो बिगड़ जाती है
और कुछ तारीफ़ में खुश भी हो जाती है. कुछ वर्षों पहले सैक्सी शब्द पर लड़कियों की
इसी तरह की गरम-नरम प्रतिक्रिया देखने को मिलती थी. लेकिन अब अधिकतर लडकियां सैक्सी
शब्द का बुरा नहीं मानती, बशर्ते उसे सभ्य तरीके
से कहा जाए. लगता है कि ऐसा ही कुछ माल शब्द के साथ भी होना चाहिए. सब्जी
या बाजार वाले परिवेश में तो माल शब्द को स्वीकार किया जाने लगा है. लडकी की तारीफ
में और सैक्सी शब्द के सामान्तर या समानार्थक इसे कब तक स्वीकार किया जाएगा, यह
देखना अभी बाकी है. देखते है माल शब्द में आखिर कितना माल (दम) है और यह सैक्सी
बराबर दमदार कब तक बनता है.
(लेखक के बारे में : – हर्षित कुमार मॉस कम्युनिकेशन (पोस्ट ग्रेजुएट) के
स्टूडेंट है. इस ब्लॉग में लिखे यह उनके निजी विचार है. ब्लॉग मोडरेटर अथवा सम्पादक
का लेखक के विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं है)

1 comment:
Completely agreed....kya khoob likhe ho.
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