Sunday, April 17, 2016

किसी से कम नहीं भारतीय ट्रक ड्राइवर



नई दिल्ली (सुभाष रतूड़ी) : टी१ प्राइमा ट्रक रेसिंग चैम्पियनशिप में भारतीय ट्रक ड्राइवरों ने अपने अनूठे प्रदर्शन से  साबित कर दिया कि वे दुनिया में किसी से कम नहीं है. भारतीय खेमे के विजेता ट्रक ड्राइवर जगत सिंह और नागार्जुन ए की ड्राइविंग निपुणता और तकनीकी विलक्षणता ने यह सन्देश दे दिया कि देश के ट्रक ड्राइवरों को हरगिज कम न आंका जाए बल्कि उन्हें ऐसे ही बेहतर अवसर और बड़े प्लेटफोर्म उपलब्ध कराया जाए जहां से वो अंतराष्ट्रीय ट्रक रेसिंग में भारत का परचम लहरा सकें. इस चैम्पियनशिप में पहली बार भारतीय ट्रक ड्राइवरों की भागीदारी ने देश की समूची ट्रकिंग इंडस्ट्री में नया जोश और उत्साह भर दिया है. जगत सिंह और नागार्जुन ए देश के सैकड़ों ट्रक ड्राइवरों के आदर्श और प्रेरणाश्रोत बन चुके है. सभी चार रेसों में से दो भारतीय ट्रक ड्राइवरों और दो अन्तराष्ट्रीय ट्रक ड्राइवरों के लिए आयोजित रेसों की तुलना की जाये तो साफ़ पता चलता है कि देश के ड्राइवरों का प्रदर्शन काफी सराहनीय रहा है. भारतीय ट्रक रेसिंग (८ ८ लेप) सुपर क्लास के विजेता नागार्जुन ए (ट्रक नंबर ४) और जगत सिंह (ट्रक नंबर ४) की औसतन स्पीड क्रमश:  ७८.३३ और ७७.१५ किलोमीटर प्रति घंटा थी जिसके लिए उन्होंने क्रमश: १५ मिनट १९ सेकेण्ड और १५ मिनट ३३ सेकेण्ड का समय लिया जबकि प्रो-क्लास केटीगिरी  में अंतराष्ट्रीय ट्रक रेसिंग (८ लेप) के विजेता मेट समरफील्ड (ट्रक नंबर १४) की स्पीड ७९.६६ किलोमीटर प्रति घंटा थी, इसके लिए उन्होंने १५ मिनट ३ सेकेण्ड का समय लिया. अंतराष्ट्रीय ट्रक रेसिंग की मुख्य चैम्पियनशिप के विजेता डेविड जेनकींस (ट्रक नंबर ११)  की स्पीड ७९.८३ किलोमीटर प्रति घंटा थी और इसके लिए उन्होंने ३७ मिनट ३४ सेकेण्ड का समय लिया, हालांकि यह रेस २० लेप की थी. ट्रक रेसिंग में स्पीड और टाइमिंग के ये नतीजे बताते है कि प्रोफेशनल विदेशी ट्रक रेसर्स की स्पीड और भारत के इन केजुअल ट्रक रेसर्स की स्पीड में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रहा. विदेशी ट्रक रेसर्स की तर्ज पर यदि भारत में भी ट्रक रेसिंग के लिए रेगुलर ट्रैनिंग व चैम्पियनशिप आयोजित होते रहें तो देश के ड्राइवर अंतराष्ट्रीय ट्रक रेसिंग में भी बादशाहत हासिल कर सकते है.
चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले सभी भारतीय ट्रक ड्राइवरों ने भी रेसिंग ट्रेक पर साबित कर दिखाया कि वे अंतराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल ट्रक ड्राइवर्स रेसर्स से किसी भी मायनो में कम नहीं है. भारत में ट्रक रेसिंग के लिए प्रतिकूल माहौल और नियमित तौर पर उपयुक्त ट्रैनिंग की ब्यवस्था न होने के बावजूद भी देशी ट्रक ड्राइवरों में वे सभी स्किल्स देखने को मिले जो सामान्य तौर पर किसी प्रोफेशनल विदेशी ट्रक रेसिंग चैम्पियंस में मौजूद होते हैं. भारतीय ट्रक रेसिंग मुकाबले के दौरान एक ट्रक द्वारा दूसरे ट्रक को पीछे से टक्कर मारने के अपवाद या घटना को छोड़ दिया जाये तो पूरी रेस में सभी ड्राइवरों का अपने ट्रक पर पूरा नियंत्रण बना रहा. भारतीय ट्रक ड्राइवर हर बार रेसिंग ट्रेक पर पूरे प्रोफेशनल रेसर्स नजर आये. उनका जोश जज्बा और मानसकि एकाग्रता देखते ही बनती थी. कहीं भी, किसी को भी ऐसा नहीं लगा कि वो पहली बार किसी अंतराष्ट्रीय ट्रेक पर रेसिंग के मैदान में उतरें हों. हालांकि इसका श्रेय इन रेस का आयोजन करने वाली देश की प्रमुख ट्रक निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स को भी जाता है जिसने भारतीय ट्रक ड्राइवरों को यह सुनहरा मौका उपलब्ध कराया. इस रेस के लिए ट्रक ड्राइवरों को एक माह से अधिक समय तक बेहतर प्रशिक्षण दिया और ड्राइवरों को अंदर छिपी प्रतिभा को इतने कम समय में बखूबी निखारा. आयोजकों का कहना है बिजेता भारतीय ट्रक ड्राइवरों की जीत का सफर यहीं नहीं रुकेगा और उन्हें लगातार प्रशिक्षण के बाद अंतराष्ट्रीय ट्रक चैम्पियनशिप के लिए तैयार किया जायेगा, जो देश और देश की उपेक्षित ट्रकिंग इंडस्ट्री के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.   
             Published in TransREporter Newspaper – 1st April 2016

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